प्रतिभा पर्व के बारे मे ....

माननीय मुख्यमंत्रीजी ने शिक्षा को अपनी सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में रखा है। जब तक शिक्षा की नींव अर्थात्‌ प्रारंभिक शिक्षा में सुधार नहीं होगा, तब तक माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा में सुधार संभव नहीं है। हर मनुष्य के जीवन एवं विकास में प्रारंभिक शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिेका होती है, क्योंकि अपनी संभावना के अनुरूप अधिकतम विकसित होने में बच्चों के लिए यह अवधि बेहद महत्वपूर्ण है। जिम्मेदार शासन एवं समाज का यह दायित्व है कि वह प्रत्येक बच्चे को उसकी पूर्ण क्षमता के अनुरूप विकसित होने में मदद करें। अतः यह आवष्यक है कि समाज की सक्रिय सहभागिता से हम व्यापक एवं पारदर्षी मूल्यांकन करावें जो बच्चे शासकीय स्कूलों में पढ़ते हैं, की शैक्षणिक उपलब्धियाँ कैसी हैं ताकि इस मूल्यांकन के आधार पर, जो खामियाँ सामने आती हैं, उनको दूर करने हेतु ईमानदारी से प्रयास किये जा सकें। इस परिप्रेक्ष्य में प्रदेश में ''प्रतिभा पर्व'' के नाम से व्यापक शैक्षिक कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है जिसके तहत प्रदेश में समस्त शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं के बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों का जायजा लिया जाएगा। इसके साथ ही शिक्षण व्यवस्था, शाला संचालन, शालेय सुविधाओं व ग्राम समाज तथा शिक्षक के संबंध आदि बिन्दुओं पर भी मूल्यांकन किया जाएगा।

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सुविधाये एवं सेवाये

प्रथम चरण
प्रथम चरण के अंतर्गत पूरे प्रदेश में एक साथ विभाग द्वारा निर्धारित तिथि (वर्ष 2011-12 के लिये 2 नवम्बर 2011) को मूल्यांकन कार्य किया गया। इसके अंतर्गत बच्चों की शैक्षिक उपलब्धियों एवं शालेय व्यवस्था का विभागीय स्तर पर जायजा लिया गया। इस मूल्यांकन में पाई गई खामियों को शिक्षक तथा स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिवासी विकास विभाग के अमले द्वारा एक अभियान के रूप में दूर करने का प्रयास किया जावेगा । bl मूल्यांकन से शिक्षकवार, विषयवार, शालावार, जनशिक्षा केन्द्रवार, संकुलवार, विकासखंडवार एवं जिलेवार स्थिति सामने आएगी। इस प्रक्रिया में हर स्तर के अधिकारियों यथा शिक्षक, जनशिक्षक, प्रधानपाठक, बीआरसी, बीईओ, संकुल प्राचार्य, डाइट स्टाफ, डीईओ, डीपीसी आदि की शैक्षिक उपलब्धियों व व्यवस्था के आधार पर जवाबदारी तय की जाएगी। यदि द्वितीय चरण के मूल्यांकन में पायी गयी शैक्षणिक उपलब्धियां स्वमूल्यांकन में शिक्षक द्वारा प्रतिवेदित शैक्षणिक उपलब्धियों के मुकाबले 10% या उससे अधिक कम उपलब्धि मिलती है तो त्रुटिपूर्ण जानकारी देने व सत्यापित करने वाले शिक्षकों/अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जावेगी। द्वितीय चरण : द्वितीय चरण में सभी विभागों के प्रथम व द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों द्वारा विभाग द्वारा निर्धारित तिथि में किया जाएगा। द्वितीय चरण में मूल्यांकन हेतु जिला स्तर से अधिकारियों को सूचीबद्ध करके रेंडम आधार पर एक दिन में 1 एवं जहॉं प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाएं साथ-साथ संचालित हो ऐसी स्थिति में 2 शालाएं आबंटित की जाएंगी। अधिकारी अपने विभाग का वाहन और अपने कार्यालय सहायक को साथ ले जा सकेंगे। जिन अधिकारियों के पास वाहन नहीं है उन्हें जिला शिक्षा केन्द्र द्वारा वाहन उपलब्ध कराए जायेंगे। अधिकारियों को जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे मूल्यांकन कार्य प्रभावी ढंग से समय सीमा में सम्पन्न हो सके।

प्रतिभा पर्व में मूल्यांकन के निर्धारित बिन्दु-
1. शालेय व्यवस्था मूल्यांकन
• प्रार्थना सभा,
• बच्चों के नाखून, दांत, बाल, ड्रेस की स्वच्छता की जांच,
• भौतिक सुविधाए- पीने का स्वच्छ पानी, टंकी की साफ-सफाई,
• आईआरआई कार्यक्रम हेतु रेडियो की उपलब्धता एवं उपयोग,
• हेडस्टार्ट अंतर्गत कम्प्यूटर की उपलब्धता, संख्या, बंद/चालू, शिक्षण में उपयोग,
• स्कूल में खेले जाने वाले खेल,खेल समय,शाला की उपलब्धि- विकासखंड/जिला/प्रदेश/राष्ट्र स्तर
• राष्ट्रीय त्योहार-शाला में मनाने की स्थिति,
• मध्याह्‌न भोजन-किचन शेड, बर्तनों की उपलब्धता, भोजन की गुणवत्ता, भोजन पूर्व हाथ धोना, भोजन पूर्व प्रार्थना,
• टीएलएम की उपलब्धता एवं उपयोग,
• स्वास्थ्य विभाग एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य जॉंच की स्थिति,
• शाला पुस्तकालय-पुस्तकों की उपलब्धता, बच्चों को वितरण, स्टाक व वितरण पंजी,
• पाठ्यपुस्तक, अभ्यास पुस्तिका, ग्लोब, चार्ट, नक्शे, सहायक शिक्षण सामग्री, रनिंग ब्लैकबोर्ड का उपयोग
• छात्र-छात्राओं के लिए पृथक-पृथक शौचालयों की उपलब्धता एवं उपयोग की स्थिति, साफ-सफार्इ्र व पानी की उपलब्धता,
• गणवेश, साइकिल वितरण,
• शाला प्रबंधन समिति (एसएमसी) का गठन एवं बैठकों की नियमितता एवं भागीदारी की स्थिति,
• भवन की स्थिति, कमरों की उपलब्धता, कमरों की साफ-सफाई, कमरों का शिक्षण में उपयोग, चित्रांकन, प्रेरक वाक्यों का लेखन, शाला की जानकारी का प्रदर्शन,
• शाला में कार्यरत शिक्षक, छात्र-शिक्षक अनुपात, शिक्षण की गुणवत्ता,
• बच्चों का नामांकन (प्रतिवेदित एवं वास्तविक), नियमित उपस्थिति, उपलब्धि स्तर, शाला से बाहर बच्चों की स्थिति,
• विकलांग बच्चों एवं वंचित वर्ग के बच्चों के शाला प्रवेश की स्थिति,
• बच्चों का सामान्य ज्ञान, अभिव्यक्ति।
• अतिथि शिक्षकों की आवश्यकतानुसार उपलब्धता।
२. शैक्षिक मूल्यांकन
• कक्षावार विषयवार माहवार निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा करने की स्थिति, शैक्षिक उपलब्धि- कक्षा के अनुरूप अपेक्षित दक्षताओं का विकास- पठन, लेखन, श्रुतलेखन, गुणा, भाग, जोड़, घटाना, पहाड़े,स्थानीय मान।
• शाला में सतत-व्यापक मूल्यांकन पर अमल की स्थिति, शैक्षिक, सहशैक्षिक, व्यक्तिगत-सामाजिक गुणों के मूल्यांकन की स्थिति, पोर्टफोलियो, एनेक्डाटल रिकार्ड के संधारण की स्थिति,
• मासिक/अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन की स्थिति, उत्तरपुस्तिकाओं की जॉंच, परिणाम का रिकार्ड, रिकार्ड अनुरूप बच्चों का स्तर,
• डी एवं ई ग्रेड बच्चों की पहचान, समूह गठन की कार्रवाई, विशेष शिक्षण कक्षाओं की व्यवस्था की स्थिति, उनके ग्रेड में सुधार की स्थिति।
• शाला/गृह कार्य देना एवं उसकी जांच की स्थिति।
शिक्षक के दायित्व-
1. शैक्षिक मूल्यांकन प्रपत्र दो प्रतियों में भरना ,
२. शैक्षणिक कलेण्डर अनुसार निर्धारित पाठयक्रम कक्षानुरूप,विषयानुरूप पूर्ण करवाना एवं बच्चों की अपेक्षित दक्षताएं विकसित करवाना,
3. शैक्षिक मूल्यांकन प्रपत्रों की दोनों प्रतियों को प्रधानाध्यापक से अभिप्रमाणित कराना,
4. शैक्षिक मूल्यांकन प्रपत्र की अभिप्रमाणित प्रतियॉं सत्यापनकर्त्ता अधिकारी को उपलब्ध कराना।
5. राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रदत्त प्रश्नपत्रों के आधार पर बच्चों का मूल्यांकन करना, उत्तरपुस्तिकाओं की जॉच करना, परिणाम की उसी दिन घोषणा करना व अभिलेख का संधारण करना।
६. शाला में पहुंचे सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों को हरसंभव सहयोग करना।
प्रधानाध्यापक के दायित्व-
1. शैक्षणिक कलेण्डर अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम कक्षानुरूप, विषयानुरूप पूर्ण करवाना एवं बच्चों की अपेक्षित दक्षताएं विकसित करवाना ,
२. शैक्षिक मूल्यांकन प्रपत्र में शिक्षक द्वारा भरी गई जानकारी की स्वयं अपने स्तर से पुष्टि करके अभिप्रमाणित करना एवं सत्यापनकर्त्ता अधिकारी को उपलब्ध कराना,
3. शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र भरकर अभिप्रमाणित करना तथा दो प्रतियों में मूल्यांकन हेतु सत्यापनकर्त्ता अधिकारी को उपलब्ध कराना,
4. आपके द्वारा अभिप्रमाणित मूल्यांकन प्रपत्रों से यह समझा जाएगा कि आपने अपने स्तर से पुष्टि कर ली है एवं शिक्षक द्वारा भरी गई जानकारी से आप सहमत है,
5. जन शिक्षक से प्रश्नपत्रों के सीलबंद लिफाफे प्राप्त करना व उनकी गोपनीयता बनाए रखना,
६. प्रश्नपत्रों के सीलबंद लिफाफे २ नवम्बर को एसएमसी की उपस्थिति में उनके हस्ताक्षर करवाकर खोलना एवं उसी दिन शाला में बच्चों से हल करवाकर एवं उत्तरपुस्तिकाएं जॅचवाकर परिणाम घोशित करना,
७. एसएमसी सदस्यों को २ नवम्बर को प्रतिभा पर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाले मूल्यांकन कार्य में उपस्थित रहने हेतु सूचित करना।
सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों के दायित्व-
1. शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक द्वारा भरे गए एवं अभिप्रमाणित किए गए मूल्यांकन प्रपत्रों के आधार पर बिन्दुवार जानकारी की पुष्टि करना व सत्यापित करना,
2. सत्यापनकर्त्ता अधिकारी के रूप में आबंटित शालाओं में 2 से 9 नवम्बर की अवधि में पहुचकर सत्यापन कार्य करना,
3. शैक्षिक मूल्यांकन और शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र सत्यापित करने पर पृथक-पृथक इसकी एक-एक प्रति शाला रिकार्ड हेतु देकर प्रधानाध्यापक से पावती लेना तथा दूसरी पृथक-पृथक प्रति बीआरसी कार्यालय में जमा कराकर उसकी पावती लेना।
जनशिक्षक के दायित्व-
1. सत्यापनकर्त्ता अधिकारी के रूप में मिले दायित्वों को बखूबी निभाना तथा शैक्षिक मूल्यांकन प्रपत्र एवं शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र के आधार पर बिन्दुवार जानकारी की पुष्टि करना व सत्यापित करना,
२. शैक्षिक मूल्यांकन और शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र सत्यापित करने पर इसकी पृथक-पृथक एक-एक प्रति शाला रिकार्ड हेतु देकर प्रधानाध्यापक से पावती लेना तथा दूसरी पृथक-पृथक प्रति बीआरसी कार्यालय में जमा कराकर उसकी पावती लेना,
3 जिन शालाओं के प्रधानाध्यापक 20 से 22 अक्टूबर 2011 की अवधि में संकुल/विकासखंड स्तर पर आयोजित प्रशिक्षण में उपस्थित न हो सके हों उन शालाओं में 28 से 31 अक्टूबर 2011 की अवधि में जाकर उन्हें मूल्यांकन प्रपत्र भरना सिखाना,
4. बीआरसी से प्रश्नपत्रों के सील बंद लिफाफे प्राप्त करना व अधीनस्थ शालाओं के प्रधानाध्यापक को सौंपकर प्रश्नपत्रों के सीलबंद लिफाफे प्राप्त करने संबंधी प्र्रधानाध्यापक से पावती लेना व उसे बीआरसी कार्यालय में जमा कराना।
बीएसी के दायित्व-
1.सत्यापनकर्त्ता अधिकारी के रूप में दायित्वों का निर्वहन करना,
२.आवश्यकता पड़ने पर जनशिक्षक के दायित्वों का निर्वहन करना।
बीआरसी के दायित्व-
1. शैक्षिक मूल्यांकन और शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र की दो-दो प्रतियॉं प्रत्येक शाला को समयसीमा में उपलब्ध कराना,
२. शिक्षक, प्रधानाध्यापक, बीएसी/जनशिक्षक को मूल्यांकन कार्य हेतु तैयार रहने हेतु सूचित करना एवं सर्वसंबंधितों को आदेश की प्रति उपलब्ध कराना,
3. सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों से मूल्यांकन प्रपत्रों के आधार पुष्टि कर लेने व सत्यापित कर देने पर मूल्यांकन प्रपत्रों की एक-एक प्रति प्राप्त करना,
4. इन मूल्यांकन प्रपत्रों को शालावार, जन शिक्षा केन्द्रवार व विकासखंडवार जमा कर बीआरसी कार्यालय में सुरक्षित रखना।
5. अक्टूबर माह में होने वाला मासिक मूल्यांकन/दक्षता संवर्द्धन मूल्यांकन के स्थान पर अब प्रतिभा पर्व का मूल्यांकन ही होगा इसकी सूचना सर्वसंबंधितों को देना,
६ सत्यानपकर्त्ता अधिकारियों के माध्यम से उन्हें आंबटित शालाओं में निर्धारित प्रपत्रों/निर्देशों के अनुरूप निर्धारित समयसीमा में कार्य संपादित कराना।
७. राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा पोर्टल पर अपलोड निर्धारित साफ्‌टवेयर में इन मूल्यांकन प्रपत्रों की शिक्षकवार, शालावार, जनशिक्षाकेन्द्रवार व विकासखंडवार एंट्री कराना,
८. डीपीसी से प्रश्नपत्रों के सील बंद लिफाफे प्राप्त करना व बीएसी/जनशिक्षकों को शालाओं में वितरण हेतु सौंपना।
डाइट फेकल्टी के दायित्व-
1. डाइट द्वारा गोद ली गई 5 शालाओं में शैक्षणिक कलेण्डर अनुसार निर्धारित पाठ्यक्रम कक्षानुरूप, विषयानुरूप पूर्ण करवाना एवं बच्चों की अपेक्षित दक्षताएं विकसित करवाना,
२. शिक्षक एवं प्रधानाध्यापक द्वारा भरे गए एवं अभिप्रमाणित किए गए मूल्यांकन प्रपत्रों के आधार पर बिन्दुवार जानकारी की पुष्टि करना व सत्यापित करना।
3. जिला स्तर पर डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयेजित कराना व इनके माध्यम से जनशिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों का संकुल/विकासखंड स्तर पर में निर्धारित तिथि एक दिवसीस प्रशिक्षण आयेजित करना।
4. सत्यापनकर्त्ता अधिकारी के रूप में आबंटित शालाओं में पहुचकर सत्यापन कार्य करना।
डीपीसी के दायित्व-
1. शैक्षिक मूल्यांकन और शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्रों की निर्धारित संख्या में फोटो कापी कराकर प्रत्येक शाला को दो-दो प्रतियों में समयसीमा में उपलब्ध कराना,
२. प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण का मूल्यांकन कार्य निर्धारित तिथि मे पूर्ण कराना,
3. सर्वसंबधितों को मूल्यांकन कार्य के निर्देश की प्रति उपलब्ध कराना,
4. राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा प्रेषित प्रश्नपत्रों को शालावार व कक्षावार एक-एक फोटोकापी कराकर सीलबंद लिफाफे में बीआरसी को सौंपना,
5. सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों के नियुक्ति आदेश संलग्न प्रारूप अनुसार जिला कलेक्टर/सीईओ,जिला पंचायत के हस्ताक्षर से जारी कराना,
6. सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों के माध्यम से स्वमूल्यांकन वाले दिन एक-एक शाला तथा जहॉं प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला साथ-साथ संचालित हों वहॉं दो शालाओं तथा स्वमूल्यांकन तिथि के पश्चात की अवधि में बाकी दिन में 3-3 शालाएं अवलोकित करने संबंधी आदेश जारी करना।
जिला शिक्षा अधिकारी/सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास के दायित्व-
1. प्राचार्य, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, प्राचार्य डाइट, डीआरसी, एवं डीपीसी से प्रतिभा पर्व की तैयारी की समीक्षा करना,
२. विभागीय अधिकारियों डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी तथा जनशिक्षक एवं प्रधानाध्यापक का प्रशिक्षण निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
3. प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण का मूल्यांकन कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
4. प्रथम चरण के प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन कार्य की मानीटरिंग करना व रिपोर्ट राज्य शिक्षा केन्द्र को उपलब्ध कराना।
प्राचार्य डाइट/डीआरसी के दायित्व-
1. विभागीय अधिकारियों डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी का प्रशिक्षण निर्धारित अवधि में जिला स्तर पर एवं जनशिक्षक तथा प्रधानाध्यापक का प्रशिक्षण निर्धारित अवधि में संकुल/विकासखंड स्तर पर पूर्ण कराना,
२. प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण का मूल्यांकन कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
3. प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण के अंतर्गत प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन कार्य की मानीटरिंग/सत्यापन कार्य करना व रिपोर्ट राज्य शिक्षा केन्द्र को उपलब्ध कराना।
प्राचार्य, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय के दायित्व-
1. प्राचार्य डाइट, डीआरसी, एवं डीपीसी से जिलेवार प्रतिभा पर्व की तैयारी की समीक्षा करना,
२. विभागीय अधिकारियों डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी तथा जनशिक्षक एवं प्रधानाध्यापक का प्रशिक्षण निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
3. प्रथम चरण के प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन कार्य की मानीटरिंग करना व रिपोर्ट राज्य शिक्षा केन्द्र को उपलब्ध कराना।
संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण के दायित्व-
1. जिला शिक्षा अधिकारी, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, प्राचार्य, शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, प्राचार्य डाइट, डीआरसी, एवं डीपीसी से जिलेवार प्रतिभा पर्व की तैयारी की समीक्षा करना,
२. विभागीय अधिकारियों, डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी तथा जनशिक्षक एवं प्रधानाध्यापक का प्रशिक्षण निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
3. प्रतिभा पर्व के प्रथम चरण का मूल्यांकन कार्य निर्धारित समयावधि में पूर्ण कराना,
4. प्रथम चरण के प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन कार्य की मानीटरिंग करना व रिपोर्ट राज्य शिक्षा केन्द्र को उपलब्ध कराना।
प्रतिभा पर्व -प्रथम चरण के आयोजन हेतु सामान्य निर्देश
1- मूल्यांकन कार्य कलेक्टर के मार्गदर्षन एवं निगरानी में होगा।
2- समस्त स्तर के प्रशिक्षण आदि पूर्ण कराकर शालाओं में मूल्यांकन कार्य की तैयारी पूर्ण कराई जाए।
3- प्रतिभा पर्व के अंतर्गत समस्त प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में एक साथ मूल्यांकन कार्य संपादित एवं उत्तरपुस्तिकाओं की जॉंच करके उसी दिन प्रधानाध्यापक द्वारा परिणाम की घोषणा की जाएगी व रिकार्ड तैयार किया जाएगा जिसके आधार पर शाला हेतु नामांकित सत्यापनकर्त्ता अधिकारी यथा डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी तथा जनशिक्षक मूल्यांकन का सत्यापन करेगें।
4- मूल्यांकन हेतु कक्षा 1 से ८ तक के लिए प्रश्नपत्र राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा डीपीसी के ई-मेल एडे्रस पर प्रेषित किए जायेंगे।
5- प्रश्नपत्रों की एक-एक प्रति शालावार, कक्षावार लिफाफे में बंद करके संबंधित शालाओं को निर्धारित समय सीमा में भिजवाना सुनिश्चित करें। प्रश्नपत्रों के बंद लिफाफे एसएमसी की उपस्थिति में खोलें जाएं।
6- उसी दिन जॉंच कर एसएमसी की उपस्थिति में परिणाम की घोषणा की जाएं।
7- शालावार नामांकित सत्यापनकर्त्ता अधिकारी यथा डाइट स्टाफ, एपीसी, बीआरसी, बीएसी, बीजीसी तथा जनशिक्षक शाला में उपस्थित होकर शिक्षक द्वारा छात्रों की उपलब्धि एवं प्रधानाध्यापक द्वारा शालेय व्यवस्था के संबंध में भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगें।
8- बीआरसी पोर्टल पर निर्धारित साफ्टवेयर में शालावार जानकारी तक अपलोड करेगें।
9- सत्यापनकर्त्ता अधिकारियों के नियुक्ति आदेश संलग्न प्रारूप अनुसार जिला कलेक्टर/सीईओ,जिला पंचायत के हस्ताक्षर से जारी कराएं-
जिला सत्यापनकर्त्ता अधिकारी का नाम पदनाम शालाओं के नाम जिनका सत्यापन किया जाना है दिनांक रिमार्क
10.शैक्षिक मूल्यांकन व शालेय व्यवस्था मूल्यांकन प्रपत्र की प्रति शाला पृथक-पृथक दो-दो प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं ताकि दो-दो प्रतियों में जानकारी तैयार की जा सकें। प्रपत्रों की एक-एक प्रति शाला में तथा दूसरी प्रति विकासखंड कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएं। इन्हीं के आधार पर आगामी दिसम्बर-जनवरी में समस्त विभाग के प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों और संभवतः जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभा पर्व के अंतर्गत द्वितीय मूल्यांकन का सत्यापन किया जाएगा।
11. मूल्यांकन अवधि में किसी भी शिक्षक का किसी भी तरह का अवकाश मान्य नहीं किया जाए। शिक्षक की अनुपस्थिति की स्थिति में संबंधित के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
12. डीपीसी द्वारा प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तौर पर फोटोकापी कराकर शालावार लिफाफे तैयार कराकर व सीलबंद कर बीआरसी को को उपलब्ध कराएं जाएं।
13. बीआरसी द्वारा उक्त बंद लिफाफों को जनशिक्षकों को सौंपा जाएं।
14. जनशिक्षकों द्वारा उक्त बंद लिफाफों को शालाओं में सुरक्षित पहुंचाया जाएं। जनशिक्षक उक्त बंद लिफाफों के वितरण की शालावार पावती भी साथ लाएं। पावती पर प्रधानाध्यापक द्वारा लिखाया जाए कि उसने सीलबंद लिफाफा प्राप्त किया है।

प्रतिभा पर्व- हेल्प डेस्क
मूल्यांकन कक्ष, राज्य शिक्षा केन्द्र
फोन/फेक्स क्र. 0755-2552362 ईमेल- examrsk@gmail.com
Diary / Calendar 2021 Diary/Calendar 2021

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