शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाने के लिए संविधान में 86वाँ संशोधन किया गया है। उल्लेखनीय है कि बच्चों के लिये निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के लागू होने के पश्चात से देश में प्रारंभिक शिक्षा को मौलिक अधिकार का दर्जा प्राप्त हो गया है; इसके तहत 6-14 साल तक के बच्चों को अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा मुहैया कराई जाएगी। सभी बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने की प्रतिबद्धता सरकार एवं समाज दोनों की है। गैर शासकीय विद्यालयों में वंचित समूह के लिए 25 फीसदी सीटें आरक्षित की गयी हैं। शिक्षा का अधिकार प्रभावी रूप में लागू हो, इसके लिये विद्यालयों में निर्धारित मापदण्ड के अनुसार अधोसंरचना की उपलब्धता तथा अध्यापकों की क्षमता एवं उनके प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बच्चों के लिये निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन के लिये राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा एन.आई.सी. के सहयोग से वेबसाइट का विकास किया गया है। वेबसाइट www.educationportal.mp.gov.in/rte के माध्यम से गैर शासकीय विद्यालयों की मान्यता तथा शिक्षा के अधिकार के नॉर्म्स के अनुसार निर्धारित संसाधनों, शिक्षकों, की उपलब्धता की निगरानी की जा सकेगी।
बच्चों के लिये निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत प्रदेश में संचालित कक्षा 1-8 तक के समस्त गैर शासकीय विद्यालयों को अपने जिले के जिला शिक्षा अधिकारी से मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है। मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा मान्यता प्राप्त करने की वेब आधारित प्रक्रिया को ऑनलाईन किया गया है। ऑनलाईन प्रक्रिया में वेबसाइट www.educationportal.mp.gov.in/rte के माध्यम से विद्यालय के प्रबन्धक/ प्रधान अध्यापक द्वारा विद्यालय से सम्बन्धित जानकारी को ऑनलाईन रूप से दर्ज की जावेगी। विद्यालय द्वारा दर्ज जानकारी पर विकास खण्ड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निर्धारित समय-सीमा में की गयी कार्यवाही को भी वेबसाईट पर देखा जा सकता है। इस मैन्यूल में मान्यता प्राप्त करने की ऑनलाईन प्रक्रिया तथा प्रत्येक स्क्रीन में प्रविष्ट की जाने वाली जानकारी को विस्तार से समझाया भी गया है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम बच्चों के लिए शिक्षा तथा भारत के भविष्य के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों से हम इस पुनीत कार्य को पूर्ण करेंगे।